गुडीपाडवा और वास्तुशास्त्र का संबंध

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चलिए जानते है गुडीपाडवा का महत्व अध्यात्मिक, पौराणिक, वैज्ञानिक तथा वास्तुशास्त्र की दृष्टिकोन से.

नमस्कार दोस्तो! आनेवाले गुडीपाडवा के उपलक्ष मे वास्तुरविराज की ओर से डॉ. रविराज अहिरराव का नमस्कार तथा नए वर्ष कि शुभ कामनाए. चलिए जानते है गुडीपाडवा का महत्व अध्यात्मिक, पौराणिक, वैज्ञानिक तथा वास्तुशास्त्र की दृष्टिकोन से.

भगवान ब्रह्मा द्वारा सृष्टी की निर्मिती का पहला दिवस याने गुडीपाडवा. भगवान रामचंद्र १४ साल का वनवास पुरा करके तथा रावण जैसी बुरी शक्ती का नाश करके अयोध्या मे पुनरागमन का दिवस याने गुडीपाडवा. विभीषण का लंका मे राज्याभिषेक तथा युधिष्टीर का इंद्रप्रस्थ नगरी का राज्याभिषेक भी गुडीपाडवा के दिन ही हुआ था. भगवान विष्णू ने ब्रह्माजी को जो चार वेद अर्पित किए वह भी गुडीपाडवा के दिन ही किए. नए संवत्सर कि शुरूवात हुई गुडीपाडवा के दिन से, सत्य युग कि शुरूवात हुई गुडीपाडवा से, वसंत ॠतु की शुरूवात होती है गुडीपाडवा से और दोस्तो भगवान महादेव और पार्वती का विवाह तय हुआ गुडीपाडवा के दिन लेकिन संपन्न हुआ अक्षय तृतीय के दिन. यह है गुडीपाडवा का महत्व.

तथा चैत्र नवरात्रि की शुरूवात याने आदिशक्ती का प्रकट दिन याने गुडीपाडवा और वेदांग ज्योतिष के अनुसार ३.५ पवित्र मुहूर्तो मे से एक मुहूर्त याने गुडीपाडवा. दोस्तो इस दिन नई प्रॉपर्टी खरीदना तथा सोना-चाँदी या वाहन की खरेदी यह बहोत बेहतरीन और पवित्र माना जाता है. दोस्तो नई प्रॉपर्टी खरीदना यह आप सभी के लिए एक बहोत ही जटील समस्या होती है लेकिन इस क्रिटिकल प्रॉब्लेम को अगर आप वास्तुशास्त्र का सहारा लेते हो तो बहोत आसान हो जाएगा और सभी मायने मे आपकी इनव्हेस्टमेंट को सही अर्थ प्राप्त हो सकता है.

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हिन्दू संस्कृती के अनुसार गुडीपाडवा के दिन तीन चीजें महत्वपूर्ण होती है. पहले, ब्रह्माजी कि पुजा, उसके बाद गुडी लगाना और तीसरी भगवान विष्णू कि पुजा.

जैसे कि आप देख रहे हो गुडी लगाना याने एक लंबी सी बाँस की या अन्य किसी भी काठी पर एक पवित्र वस्त्र उसके उपर कलश और साथ ही फुलों कि माला, कडुनीम के पत्ते और शक्कर की गाँठी इन सभी को एकत्रित करके आप के घर के बाहर अच्छी सी जगह पर गुडी फहराई जाती है. वास्तुशास्त्र के अनुसार एक महत्वपूर्ण बात मै आपको यहा बताना चाहुँगा के खास करके यह गुडी आप उत्तर, ईशान्य या पूरब याने नॉर्थ, नॉर्थ-ईस्ट या ईस्ट मे अगर फहराते हो तो विश्‍व कि जो पवित्र उर्जा हमारे वास्तु मे आती है, वह इस उत्तर से पूरब के बीच मे से ही आती है.

तो गुडीपाडवा के दिन यह उर्जा जब आपके लगाई हुई गुडी के माध्यम से आती है क्योंकि इस गुडी मे जो हम बाँस की लकडी इस्तेमाल करते है वह सृष्टी तथा मांगल्य का प्रतिक है. इसमे जो हम कपडा इस्तेमाल करते है वह है वैभव याने लक्झरी का प्रतिक. इसमे हम कलश इस्तेमाल करते है वह है मांगल्य तथा विश्‍व कि प्रजापति उर्जा आकाश से हमारे घर मे लाने का एक प्रयास. फुलों के माध्यम से हमे पवित्रता मिलती है, शक्कर के गाँठी के माध्यम से हमे माधुर्य याने स्वीटनेस मिलता है, तो हल्दी-कूंकूम के माध्यम से हमें पवित्रता प्राप्त होती है और यह सारी वैश्‍विक उर्जा जब इन सात पवित्र माध्यमों से अगर हमारे घर मे आती है तो निश्‍चित रूप से यह वैश्‍विक उर्जा हमारे घर मे, हमारी वास्तु मे एक बहोत ही बहतरीन पॉझिटीव्ह इफेक्ट क्रिएट करता है.

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जैसे कि मै ने आपको बताया कि ३.५ पवित्र मुहूर्तोे मे से एक है गुडीपाडवा, इसलिए दोस्तो अगर आप नया घर खरीदने का सोच रहे हो तो गुडीपाडवा के दिन निश्‍चित रूप से नई प्रॉपर्टी जरूर खरीदे. और अगर गुडीपाडवा के दिन अगर पॉसिबल नही होता है तो एक महीने के अंदर आपके लिए और दुसरा पवित्र मुहूर्त आ रहा है जो कि अक्षय तृतीया याने बैसाखी. नई प्रापर्टी कि खरेदी या फिर सोना-चाँदी के जेवर या फिर अगर आप कार या कोई वेहिकल लेना चाहते हो तो गुडीपाडवा जैसा बेहतरीन मुहूर्त नही, यह मे आपको जरूर बाताना चाहूंगा और दोस्तो गुडीपाडवा के दिन अगर आप अपने घर मे श्रीयंत्र लाते हो तो मै कहूंगा सोना-चाँदी तथा धनसंपत्ती कि देवता को आप अपने घर मे लाओगे जिसके माध्यम से हर त्योहार के दिन आपके घर मे ऐसी कुछ अच्छी चीजे आने की संभावना जरूर विकसीत होती है.

दोस्तो, नई वास्तु याने उसका सिलेक्शन और वह भी खास करके मै यह बताना चाहूंगा कि प्लेसमेंट या फेसिंग इसका सारा जो कंन्फयुजन आपके सामने आता है इसलिए वास्तुशास्त्र के आधार पर आप अगर इसका चयन करोगे तो मे डेफिनेटली कहूंगा कि आप की इनव्हेंस्टमेंट को सही अर्थ वास्तुशास्त्र के माध्यम से प्राप्त होगा. दोस्तो होली पौर्णिमा के बाद आप घर की सफाई की शुरूवात अभियान करते हो तो गुडीपाडवा के एक दिन पहले आप को घर का सारा क्लटर, अनवॉन्टेड सामान, नेगेटिव्ह एनर्जी पुरी तरह से बाहर निकालनी है, क्योंकि गुडीपाडवा से सृष्टी को होनेवाला परिवर्तन और ढेर सारी आध्यात्मिक पुजा-पाठ के माध्यम से आप अपनी वास्तु मे एक बहोत ही बेहतरीन पवित्र पॉझिटीव्ह उर्जा निर्माण करने जा रहे है जिसके माध्यम से आनेवाला पूर्ण वर्ष आपके लिए लाभदायी, फलदायी और पॉझिटीव्ह होगा.

और एक महत्वपूर्ण बात, गुडीपाडवा के उपलक्ष मे आपको बताना चाहूंगा कि अगर आपके घर मे आपके भगवान का मंदिर पूरे घर के ईशान्य कोन मे नही होगा तो आज के दिन याने गुडीपाडवा के दिन निश्‍चित रूप से उसे आपके घर के ईशान्य कोन मे जरूर लाईए जिसकी वजह से आपके हर एक रूके हुए प्रॉब्लेम्स को सॉल्यूशन्स मिलने कि शुरूवात हो जाएगी. सो इसी के साथ गुडीपाडवा कि शुभकामनाएँ. धन्यवाद!

डॉक्टर रविराज अहिरराव
वास्तू तज्ज्ञ.

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